नया क्या है?

2018 ने विदाई ले ली। 2019 का आगमन हो गया। रात 12 बजते ही लोगों में निशाचरी वृत्ति जागृत हो गयी, 1 घंटे तक पटाखे दगाये गए, प्रदूषित हवा को और प्रदूषित किया गया, वृद्धों और बीमारों की नींद हराम कर, स्वयं आनंद से झमे।

हर एक दिन इसी तरह बीत जाता है, हर एक का आगमन और अंत इसी प्रकार होता है, तो फिर एक विशेष दिवस के बीत जाने पर उन्मत्त होने का कारण आज तक मैं समझ पाने में असमर्थ हूँ। हमने कल मानव सभ्यता के लिए कौन सा ऐसा कार्य कर दिया जिसका उत्सव इतनी भव्यता से मनाया गया?

एक वर्ष बहुत लंबा समय होता है, हम इस समय में बहुत कुछ पाते हैं और बहुत कुछ खो देते हैं, इसीलिए जीवन का आंकलन कभी वर्षों में किया ही नहीं जा सकता। जीवन तो एक एक क्षण में वास करता है। इसका एक एक पल नया है, और हर नए क्षण में हम अपने जीवन को अधिक सुखद बना सकते हैं।

बिना दार्शनिक हुए, मुद्दे पर आता हूँ। हमारा आनंद हम में ही वास करता है। हमें खुशी अपनी सफलता में ढूंढनी चाहिए। हमारे जीवन के जो दिन हमें सुख से भर दें, वो दिन हमारे लिए उत्सव हैं, वही मेरे लिए दिवाली, होली और नया साल है। महज़ समाज जहाँ निरुद्देश्य उत्सव मनाये वहां सम्मिलित होना मेरे लिए संभव नहीं। जैसे कि मधुशाला में बच्चन जी ने कहा है, “दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला”

इसीलिए, 2019 केवल एक गणना है, उससे अधिक कुछ नहीं। individualistic बनिए, अपने आप को अपने जीवन का केंद्र बनाइये, ना कि किसी काल्पनिक दिन को।

तो इस पल की हार्दिक शुभकामनाएं। इस दिन की ढेर सारी बधाइयाँ।

आप अपना अभीष्ट प्रतिदिन प्राप्त करें, ऐसी मेरी अभिलाषा है।

पढ़ने के लिए शुक्रिया!

टिपण्णी ज़रूर करिएगा!

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